भारत में किस जाती को सबसे ऊँची जाती माना गया है

 हेलो दोस्तों आज हम इस आर्टिकल में भारत की सबसे ऊँची जाती के बारे में जाने गए ! तो आप हमारे साथ बने रहे सुरु से लेकर आखिर तक ----



भारत में ही क्या विश्व में अगर किसी जाति को हम सबसे ऊंचा कह सकते हैं तो वह सिर्फ और सिर्फ इंसानियत ही होगी

सबसे बड़ी जाती 

हम सभी जानते है की कोई भी जाती बड़ी नहीं होती यह सब हमारी सोच है सभी एक समान होते हां वेदो के अनुसार कि मराठा जाति भारत की सबसे बड़ी जाति है और महाराष्ट्र में शक्ति संरचना पर हावी है, क्योंकि उनकी संख्यात्मक शक्ति, विशेष रूप से ग्रामीण समाज में।


ब्राह्मण जाती सबसे बड़ी वह निजी जाती ही है 


भारतवर्ष में सबसे ऊँची जाति ब्राह्मण है।

 ब्राह्मणों में ऊँच-नीच के असंख्य भेद हैं। प्रदेश-गत भेद भी गिनकर खतम नहीं किये जा सकते। इसलिए यह कहना असम्भव है कि ब्राह्मणों की कौन श्रेणी सबसे ऊँची है। दक्षिण भारत में स्पर्श-विचार और भी प्रबल है। वहाँ जिनके स्पर्श से ब्राह्मण लोग अपवित्र नहीं होते और जिनका जल ग्रहणीय होता है वे ही अच्छी जातियाँ हैं। नीच जाति का छुआ जल ग्रहण करने योग्य नहीं होता। जिनके छूने से मिट्टी के बर्तन भी अपवित्र हो जाते हैं, वे और भी नीच हैं। उनके भी नीचे वे हैं जिनके छूने से धातु के पात्र भी अपवित्र हो जाते हैं। इनके भी नीचे वे जातियाँ हैं, जो यदि मन्दिर के प्रांगण में प्रवेश करें तो मन्दिर अपवित्र हो जाता है। कुछ ऐसी भी जातियाँ हैं जिनके किसी ग्राम या नगर में प्रवेश करने पर समूचा गाँव-का-गाँव अशुद्ध हो जाता है। आजकल इस छूआछूत के विषय में नाना स्थानों में लोक-मत हिल चुका है।

 जो लोग सौभाग्यवश ऊँची जाति में उत्पन्न हुए हैं, वे प्राय: इतना विचार पसन्द नहीं करते, और जो लोग दुर्भाग्यवश तथाकथित नीची जातियों में जन्में हैं, वे अब अपने को एकदम हीन और पतित मानने को तैयार नहीं है, किन्तु नीची जातियों में अपने से नीच जातियों को दबा रखने का प्रयास प्राय: ही दिखायी दे जाता है। स्वामी दयानन्द का कहना है कि ‘‘भारतवर्ष में असंख्य जातिभेद के स्थान पर केवल चार वर्ण रहें। ये चार वर्ण भी गुण-कर्म के द्वारा निश्चित हों, जनम से नहीं। वेद के अधिकार से कोई भी वर्ण वंचित न हो।’’ महात्मा गाँधी अस्पृश्यता के विरोधी हैं, किन्तु वर्णाश्रम व्यवस्था के विरोधी नहीं हैं। वर्णाश्रम मनुष्य के स्वभाव में निहित है हिन्दू-धर्म ने उसे ही वैज्ञानिक रूप में प्रतिष्ठित किया है। जन्म से वर्ण निर्णीत होता है, इच्छा करके कोई इसे बदल नहीं सकता।.


भारत में सबसे बड़ी जाती 

मनुष्य के कर्म उसकी सबसे ऊंची जाति है

पूरा इतिहास देख लीजिए उठाकर महर्षि वाल्मीकि से लेकर वर्तमान राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद तक

जन्म के कुछ समय बाद जाति का अभिमान हो सकता है किंतु उसके बाद आपके द्वारा किए गए कर्म ही आपको आपका स्थान दिलाते हैं ।


जो इंसान ऊंची नीची जाति के बारे में सोचता है वो नीच मानसिकता को दर्शाता है।

सनातन धर्म में जरूर हैं अनेक जातियों में बटे पर हम सब उच्च नीच जिस वर्ण वयस्था खेहते वो गलत है ।आज हर जाति एक सम्मान रखता हिंदू धर्म में

वैसे हम समुदाय को समर्थन जरूर करते ।


जाट समाज के सभी गोत्रों की लिस्ट

आदुनिक भारत में सबसे ऊँची जाती !

आधुनिक भारत में जाति व्यवस्था थोड़ी जटिल है , पुराने ज़माने की वर्ण व्यवस्था से भी कहीं ज्यादा उलझी हुई। अब वर्ण और जाति आपकी हैसियत से तय होते है। नया वर्गीकरण कुछ इस प्रकार है ,

सबसे ऊँची जाति नेताओ की है , भले किसी भी दल में हो , किसी भी वर्ग से हो या किसी भी प्रान्त के हो, इन सबके ठसके एक जैसे है , न कोई इन्हे रोक सकता है , न टोक सकता है। ये कानून बनाते भी है और कानून को अपने हिसाब से परिभाषित करने की ताकत भी रखते है। ये एक दूसरे का ख्याल रखते है , सहायता करते है इसीलिए नेताओ को मौसेरे भाई कहा जाता है। वैसे रुतबे के हिसाब से नेताओ में भी कई स्तर है , ऊँचे दर्जे के नेता , मध्यम दर्जे और निचले के दर्जे नेता।

फिर नंबर आता है अरबपतियों का , जो सरकार की नब्ज जानते है। इनका स्थान उच्च दर्जे के नेता से कम मगर मध्यम दर्जे के नेता से ऊँचा होता है।

फिर आता है अधिकारी वर्ग , कोई भी मौसम हो , कोई आये -कोई जाए, इन्हे कोई फर्क नहीं पड़ता , इनकी जमीं हमेशा हरी ही रहती है।

गुंडे -मवालियो का भी अपना एक विशिष्ठ स्थान है इस सोसाइटी में , कोई सिर्फ गुंडागर्दी करता है , मगर उच्च दर्जे के गुंडे वे है जो साथ में नेतागिरी भी करते है।

इसके बाद छोटे व्यापारी और छोटे अधिकारी वर्ग

और सबसे आखिरी में हम जैसे लोग ,

अब आप इस वर्गीकरण को चाहे जो भी नाम दे दे।



तो दोस्तों हमारा आर्टिकल आपको कैसे लगा हमे जरूर बताइये गा  कॉमेट बॉक्स में  


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