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सितंबर, 2022 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

फांसी देते समय जल्लाद कैदी के कान में क्या कहता है?

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हेलो दोस्तों आज हम इस आर्टिकल में आप को फांसी के समय जल्लाद के बारे कुछ अनोखी बात बताये गे  तो आप हमारे साथ बने रहिये  जिस दिन फाँसी होती है उस दिन फाँसी घर में सभी काम इशारों में होते हैं, कोई कुछ बोलता नही है ।जल्लाद तैयारी पूरी होने के बाद जेल अधीक्षक को इशारा करता है और जैसे ही जेल अधीक्षक हाथ में पकड़े रुमाल से जल्लाद को इशारा करता है, जल्लाद तुरंत अपना काम कर देता है । 15 -20 मिनट बाद लाश उतार ली जाती है वहाँ मौजूद जेल का डॉक्टर मौत की पुष्टि करता है । कैदी को लाने और फाँसी देने की ये परिक्रिया 2 घंटे से भी कम समय में पूरी हो जाती है, क्योकिं ट्रायल जल्लाद एक दिन पहले ही कर लेता है । फाँसी वाले दिन सुबह कैदी को जेल कोठरी से लाने से लेकर और फाँसी पर लटकाने तक कोई कुछ भी नहीं बोलता, सब बातचीत इशारों में ही होती है । माफी मांगना या अंतिम इच्छा पूछना जैसे काम जेल अधिकारी फाँसी देने से 1–2 दिन पहले ही निपटा लेते हैं । फाँसी की सज़ा अमल होने से २-४ दिनों पहले, जल्लाद को जेल आना पड़ता है। वहां, वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में उन्हें फाँसी का अभ्यास करना पड़ता है। इसमें उन्हें फंदे...

भारत देश में कितने प्रकार की जातियां निवास करती हैं?

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 हेलो आज हम इस आर्टिकल अपने भारत देश में जातियों के बारे में जानेगे  तो आप हमारे साथ बने रहे सुर से लेकर आखिर तक तो आइये शुरू करे  जाति > एक गाँव में स्थित परिवारों का ऐसा समूह वास्तव में अपनी बड़ी जातीय इकाई का अंग होता है जिसका संगठन तथा क्रियात्मक संबंधों की दृष्टि से एक सीमित क्षेत्र होता है, जिसकी परिधि सामान्यत: 20-25 मील होती है। उस क्षेत्र में जातिविशेष की एक विशिष्ट आर्थिक तथा सामाजिक मर्यादा होती है जो उसके सदस्यों को, जो जन्मना होते हैं, परम्परा से प्राप्त होती है। यह जातीय मर्यादा जीवन पर्यंत बनी रहती है और जातीय धंधा छोड़कर दूसरा धंधा अपनाने से तथा आमदनी के उतार चढ़ाव से उसपर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। यह मर्यादा जातीय-पेशा, आर्थिक स्थिति, धार्मिक संस्कार, सांस्कृतिक परिष्कार और राजनीतिक सत्ता से निर्धारित होती है और निर्धारकों में परिवर्तन आने से इसमें परिवर्तन भी संभव है। किंतु एक जाति स्वयं अनेक उपजातियों तथा समूहों में विभक्त रहती है। इस विभाजन का आधार बहुधा एक ही पेशे के अंदर विशेषीकरण के भेद प्रभेद होते हैं।  किंतु भौगोलिक स्थानांतरण ने भी एक ही परं...

गुर्जर कौन सी जाति है? इतिहास में इसका क्या योगदान है?

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हेलो दोस्तों आज हम गुजर जाती वह इस का इतिहास भी जाने गे  और इनका इतिहास में क्या योगदान रहा है उस के बारे में भी बात भी करेगे तो आप हमारे साथ बने रहिये  गुजर जाती का अर्थ  संस्कृत के विद्वानों के अनुसार, गुर्जर शुद्ध संस्कृत शब्द है, जिसका अर्थ ' शत्रु का नाश करने वाला ' अर्थात 'शत्रु विनाशक' होता है। प्राचीन महाकवि राजशेखर ने गुर्जर नरेश महिपाल को अपने महाकाव्य में दहाड़ता गुर्जर कह कर सम्बोधित किया है। गुर्जर कौन सी जाति है गुर्जर समाज, प्राचीन एवं प्रतिष्ठित समाज में से एक है । यह समुदाय जो पहले गोचर, गुज्जर, गूजर, गोजर, आजादी के बाद से गुर्जर, गूर्जर और वीर गुर्जर नाम से भी जाना जाता है। गुर्जर मुख्यत: उत्तर भारत, पाकिस्तान और अफ़्ग़ानिस्तान में बसे हैं। इस जाति का नाम अफ़्ग़ानिस्तान के राष्ट्रगान में भी आता है। गुजर जाती सबसे ज्यादा खा पाई जाती है  गुजर जाती भारत में पाई जाती हे गुजरात और हरियाणा में अधिक है पाकिस्तान में भी पाई जाती हे  गुर्जर जाति की उत्पत्ति कहाँ से हुई? प्राचीन इतिहास के जानकारों के अनुसार गूजर मध्य एशिया के कॉकेशस क्षेत्र ( अभी के आर्म...

बिहार में कौन सी जाति सबसे शक्तिशाली है ?

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हेलो दोस्तों आज हम इस आर्टिकल में आप को बिहार के सबसे शक्तिशाली जाती के बारे में बात करे तो हमारे साथ बने रहे  बिहार का इतिहास ही जातिवादी बुनियाद पर टिका हुआ एवं बना हुआ है. शक्ति प्रदर्शन किसी भी जाती के लिए आम बात है. इस प्रश्न का उत्तर साफ़ शब्दों में नहीं दिया जा सकता है. सच पूछिए तो कोई किसी से कम नहीं है और ना ही अब सामंती प्रथा है.  आप सभी जातियों में देखेंगे की दो वर्ग में बंट चुके हैं. पहला साहूकार और दूसरा मजदूर वर्ग. ऊंची जातियों में भी आपको ये दोनों मिल जायेंगे और नीची जाती में भी. क्षेत्र के हिसाब से अलग अलग जातियों का बर्चास्व रहा. जैसे अगर आप मध्य बिहार में चले जाए तो भूमिहार और राजपूत जाती का दबदबा रहा लेकिन अगर मैं दक्षिण बिहार की बात करता हूँ तो राजपूत और यादवों का बर्चश्व रहा.  जहानाबाद, औरंगाबाद, गया, नवादा में खुनी संघर्ष का कुछ सालों से विराम हो चूका है लेकिन आप बर्चास्व की बात करें तो नकली माओवाद और सामंतवाद की लड़ाई में भूमिहारों का अंततोगत्वा दबदबा रहा. चम्पारण, बेतिया, सीतामढ़ी, छपरा, मोतिहारी, जमुई, बांका की बात करू तो राजपूतों का हमेशा बर्चश्व रह...

भारत में कौन सी जाति पहले से ही है?

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 हेलो दोस्तों आज हम इस आर्टिकल में भारत की सबसे पहले जाती के बारे में बात करे गे और उस की उतपति और इतिहास भी जाने गे  भारत में कौन से जाती पहले से ही है? जेसी देखा जाये आधी मानव जाति के लोगों से लेकर 1800 वे सतक तक संस्कृत भाषा के उच्चारण किया जाथा था ओ आज भी कही जगह बोली जाती है परंतु अपने अहा जादा तर जागलो मे ही ये लोग रहते है भारत में तो संसकृति ही जादा बोली जाती है भारत में सबसे पहले जाती  भारत में सबसे पहले  हिंदू धर्म का जन्म हुआ था तो हिंदू  जाति सबसे पहले  आई  थी भारत  के अंदर ब्राह्मण महर्षियों (आनुवंशिक रूप से बोलने वाले) के प्रत्यक्ष वंशज हैं और उनके पास अपने ऋषि या ऋषि के प्रति निष्ठा और निष्ठा के साथ खुद को पहचानने के लिए एक गोत्र है। भगवद् गीता में एक श्लोक है जिसमें उल्लेख किया गया है कि: "वह यज्ञ जो पवित्रता से रहित हो, देवताओं को मंत्रों का जाप, जन्म के लिए दो बार पूजा और ब्राह्मणों को उपहार तामसिका होने की घोषणा की जाती है" - तो भगवान कृष्ण ने कहा है खुद ने यह घोषित किया, (मैं अध्याय और कविता संख्या और सटीक शब्द भूल गया, लेकिन यह...

भारत में किस जाती को सबसे ऊँची जाती माना गया है

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 हेलो दोस्तों आज हम इस आर्टिकल में भारत की सबसे ऊँची जाती के बारे में जाने गए ! तो आप हमारे साथ बने रहे सुरु से लेकर आखिर तक ---- भारत में ही क्या विश्व में अगर किसी जाति को हम सबसे ऊंचा कह सकते हैं तो वह सिर्फ और सिर्फ  इंसानियत  ही होगी सबसे बड़ी जाती  हम सभी जानते है की कोई भी जाती बड़ी नहीं होती यह सब हमारी सोच है सभी एक समान होते हां वेदो के अनुसार  कि मराठा  जाति भारत  की  सबसे बड़ी जाति  है और महाराष्ट्र में शक्ति संरचना पर हावी है, क्योंकि उनकी संख्यात्मक शक्ति, विशेष रूप से ग्रामीण समाज में। ब्राह्मण जाती सबसे बड़ी वह निजी जाती ही है  जांगिड़ जाति - की उत्पत्ति और इतिहास भारतवर्ष में सबसे ऊँची जाति ब्राह्मण है।  ब्राह्मणों में ऊँच-नीच के असंख्य भेद हैं। प्रदेश-गत भेद भी गिनकर खतम नहीं किये जा सकते। इसलिए यह कहना असम्भव है कि ब्राह्मणों की कौन श्रेणी सबसे ऊँची है। दक्षिण भारत में स्पर्श-विचार और भी प्रबल है। वहाँ जिनके स्पर्श से ब्राह्मण लोग अपवित्र नहीं होते और जिनका जल ग्रहणीय होता है वे ही अच्छी जातियाँ हैं। नीच जाति का छुआ ...

Verma Caste- और इनका इतिहास

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 हेलो दोस्तों आज हम इस आर्टिकल में वर्मा जाती और उसके इतिहास के बारे में जाने गे ! आप इस आर्टिकल को सुरु से लेकर लास्ट तक आराम से पढ़े   Verma Caste   मुख्य रूप से क्षत्रिय वर्ण से उत्पन्न जाति के लोग वर्मा लिखते हैं। वर्मा (अंग्रेजी: वर्मा, (अन्य नाम) वर्मन या बर्मन) हिंदू धर्म का एक जाति सूचक है, जिसे वर्तमान भारत और दक्षिण पूर्व एशिया में रहने वाले सभी हिंदुओं द्वारा गर्व से इसके नाम के आगे लिखा जाता है।   परन्तु आधुनिकता के इस दौर में अन्य जातियों के लोग भी इस उपनाम को अपने नाम के आगे लगाने लगे हैं । वर्मा व इसके अन्य समानार्थक उपनाम का शाब्दिक अर्थ है ढाल या सुरक्षा। जाट समाज के सभी गोत्रों की लिस्ट - Verma का गोत्र ?  इसे सुनेंरोकेंइनका गोत्र –  वशिष्ठ  हैं तथा प्रवर वशिष्ठ, अत्रि और सांकृति है वर्मा जाती की केटेगिरी  वर्मा जाती OBC केटेगिरी में आती है  Nayak Caste- वह उसकी उतपति और इतिहास वर्मा क्या है  Verma = वर्मा (Verma) वर्मा (अंग्रेजी: Varma, (अन्य नाम) वर्मन या बर्मन) हिन्दू धर्म का एक जाति सूचक उपनाम है ...

Jaat Caste List in india (जाट समाज के सभी गोत्रों की लिस्ट )

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हेलो दोस्तों आज हम इस आर्टिकल जाट समाज की उतपति वह जाट समाज में आने वाली जातिओ की लिस्ट को देखेगे   जाट भारत और पाकिस्तान में रहने वाला एक क्षत्रिय समुदाय है। भारत में मुख्य रूप से पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली, उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश और गुजरात में वसते हैं। पंजाब में यह जट कहलाते हैं तथा शेष प्रदेशों में जाट कहलाते है। यह अति प्राचीन क्षत्रिय समुदाय है जाट शब्द की उतपति  जाट शब्द का निर्माण संस्कृत के ‘ज्ञात’ शब्द से हुआ है। अथवा यों कहिये की यह ‘ज्ञात’ शब्द का अपभ्रंश है। लगभग १४५० वर्ष ई० पूर्व में अथवा महाभारत काल में भारत में अराजकता का व्यापक प्रभाव था। यह चर्म सीमा को लाँघ चुका था। उत्तरी भारत में साम्राज्यवादी शासकों ने प्रजा को असह्य विपदा में डाल रखा था। इस स्थिति को देखकर कृष्ण ने अग्रज बलराम की सहायता से कंस को समाप्त कर उग्रसेन को मथुरा का शासक नियुक्त किया। कृष्ण ने साम्राज्यवादी शासकों से संघर्ष करने हेतु एक संघ का निर्माण किया। उस समय यादवों के अनेक कुल थे किंतु सर्व प्रथम उन्होंने अन्धक और वृष्नी कुलों का ही संघ बनाया। संघ के सदस्य आपस में सम्बन्धी हो...